Poetry: Personal Reflection.

My understanding of poetry is average, in that I understand basic concepts, symbolism and such. However, I face difficulty in understanding the technical terms that are used, even though I may recognize their use.

I feel that when it comes down to understanding a poem, technical poetic terms have less value. Their function is to enhance the poem and its use of language. Basic understanding and comprehension can come to those who don’t know what sibilance is.

With this unit, I hope to understand poetic terms better and simultaneously improve my knowledge and ability to decipher symbolism.

What I’m Looking Forward to this School Year.

As a new student, I was, at first, a little apprehensive. However, in terms of resources and the overall environment, I can now confidently say that school life is very enjoyable.

Over the year, I hope to improve myself academically as well as in terms of my character. I want to broaden my understanding of the world and actively participate in all of my clubs and GCs.

बात अठन्नी की

मैंने अपने कक्षा में यह कहानी की पढ़ाई की है। यह पाठ भारत के सामाजिक विभाजन को आकर्षित करती है। कहानी के नायक हैं रसीला, जो एक अमीर एंजिनीयर बाबू के यहाँ काम करता है। थोड़ी देर में पता चल जाता है की एंजिनीर बाबू पूरी तरह से भ्रष्ट हैं। परंतु रसीला ने कभी उनके तरह धर्म नहीं छोड़ा।

कम वेतन के कारण रसीला ने अपने मित्र रमज़ान से ऋण के कुछ पैसे ले लिए। एक दिन रसीला के मालिक ने उसे पाँच रुपये की मिठाई लाने के लिए भेजा। रसीला को अपने मित्र को अपना क़र्ज़ चुकाना था(एक अठन्नी), तो उसने सोचा की वह सड़ें चार रुपय की मिठाई लेकर अपने आधे रुपय का क़र्ज़ चुका देगा। वह पकड़ा गया, और एंजिनीर बाबू, जिन्होंने एक समय में पाँच सौ रुपय की रिश्वत ली थी, रसीला को पलीस थाने ले गए, जहाँ उन्होंने हवलदार को पैसे देकर अंदर भेज दिया।

यह कहानी में व्यंग्य है की एक भ्रष्ट आदमी ने अपने घर के नौकर को पलीस के हवाले एक अठन्नी के ऊपर कर दिया। ज़िला मैजिस्ट्रेट शेक सालीमुद्दीन भी तो एक बार में ही हज़ार रुपय रिश्वत खाते थे। आज की दुनिया में अगर आपके पास पैसें हैं आप दुष्कर्म से क़ानून की मुसीबत में नहीं पड़ोगे, क्योंकि हर कही लोग भ्रष्ट हो गए हैं। ५००-१००० रुपय के अमीर चोर आराम से अपने घरों में बैठे थे, और एक ग़रीब अठन्नी का चोर तीन महीने के लिए जेल में चला गया।

 

First Post, First Day.

My first day at UWCSEA was enlightening as well as very, very different from my previous educational experiences. The style of teaching, the teacher-student relationship, even the way my classmates sat, it was so much more relaxed than I had expected, and to be honest, I think I prefer it that way. I hope things stay light and fun in the same way.